रामायण के 'मंगल रंग' गाने पर छिड़ा विवाद! ए. आर. रहमान की धुन में कव्वाली की झलक? सोशल मीडिया पर बंटी दर्शकों की राय
एंटरटेनमेंट डेस्क | ECARDSNAP NEWS | 2 नवंबर 2026
मुंबई: निर्देशक नितेश तिवारी की बहुचर्चित फिल्म 'रामायण' का नया गाना 'मंगल रंग' रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान के इस गीत को लेकर कुछ दर्शकों ने सवाल उठाए हैं कि क्या भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह पर आधारित गीत में कव्वाली और सूफी संगीत जैसी धुनों का इस्तेमाल उचित है?
वहीं दूसरी तरफ कई संगीत प्रेमियों ने गाने की मधुरता, गायकी और अलग संगीत शैली की सराहना की है।
'मंगल रंग' में क्या है खास?
25 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुए इस गीत को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। गीत के बोल प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं, जबकि संगीत ए. आर. रहमान ने तैयार किया है।
गाने में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के रूप में दिखाई देते हैं। इसमें राम-सीता के विवाह से जुड़े भव्य दृश्यों को प्रस्तुत किया गया है।
आखिर विवाद क्यों हुआ?
गाना सामने आने के बाद सोशल मीडिया के कुछ यूजर्स ने इसकी धुन, कोरस और संगीत संयोजन की तुलना कव्वाली तथा सूफी शैली से करनी शुरू कर दी।
कुछ दर्शकों का मानना है कि रामायण जैसी पौराणिक कथा पर आधारित फिल्म में वीणा, सितार, मृदंग और पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों को अधिक प्रमुखता मिलनी चाहिए थी।
कई लोगों ने गाने की तुलना रहमान की पुरानी रचना 'कुन फाया कुन' से भी की है।
हालांकि संगीत की कुछ समानताओं से यह साबित नहीं होता कि 'मंगल रंग' वास्तव में कव्वाली है।
रहमान के समर्थन में भी उतरे संगीत प्रेमी
विवाद के बीच कई श्रोताओं ने ए. आर. रहमान का समर्थन किया है।
उनका कहना है कि संगीत की अलग-अलग शैलियों का मेल भारतीय फिल्म संगीत की पुरानी परंपरा रही है। किसी रचना में कोरस या मिलती-जुलती धुन होना उसे अपने आप किसी एक संगीत शैली का गीत नहीं बना देता।
समर्थकों के अनुसार, गाने की भावनाएँ, अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की गायकी और भव्य दृश्य इसे खास बनाते हैं।
ए. आर. रहमान ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए रहमान ने कहा कि रामायण जैसी फिल्म के लिए संगीत तैयार करना बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लगातार काम के बीच उन्हें हर प्रतिक्रिया पढ़ने का समय नहीं मिलता।
संगीत की रचनात्मक आजादी या परंपरा का सवाल?
'मंगल रंग' को लेकर उठी बहस अब केवल एक गाने तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी चर्चा में है कि धार्मिक और पौराणिक फिल्मों में संगीत कितना पारंपरिक होना चाहिए और रचनात्मक प्रयोगों की कितनी गुंजाइश होनी चाहिए।
फिलहाल दर्शकों की राय बंटी हुई है। कुछ लोग पारंपरिक धुन की अपेक्षा कर रहे हैं तो कुछ रहमान के संगीत प्रयोग को पसंद कर रहे हैं।
आपकी राय क्या है? क्या 'रामायण' के गानों में केवल पारंपरिक संगीत होना चाहिए, या आधुनिक संगीत के प्रयोग भी स्वीकार्य हैं?
स्रोत: NDTV, India Today, Mint और Moneycontrol की 25–28 अक्टूबर 2026 की प्रकाशित रिपोर्टें।
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